एक गधे की आत्मकथा

एक गधे की आत्मकथा
Год выхода 1947
कृशनचंदर के लोकप्रिय उपन्यास एक गधे की आत्मकथा में आदमी की भाषा में बोलने वाले एक गधे के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं पर करारा व्यंग्य किया गया है। इस उपन्यास के विचित्र संसार में सरकारी दफ्तरों के निठल्ले आफीसर, लाइसेंस के चक्कर में घूमने वाले व्यवसायी, चुनाव के जोड़-तोड़ में लगे नेता, साहित्य के मठाधीश, माडर्न आर्ट के नाम पर जनता को चक्è
